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GST, बेरोज़गारी और महंगाई—तीनों मोर्चों पर आम जनता को गहरी निराशा

By on February 2, 2026 0 39 Views

रामनगर ।पेश किए गए बजट ने GST, बेरोज़गारी और महंगाई—तीनों मोर्चों पर आम जनता को गहरी निराशा दी है। सरकार बड़े आंकड़ों की बात कर रही है, लेकिन आम आदमी की ज़िंदगी लगातार मुश्किल होती जा रही है।

GST लागू हुए 7 साल से अधिक हो चुके हैं, फिर भी यह व्यवस्था आज भी सरल नहीं बन पाई है। छोटे और मध्यम व्यापारियों को साल में 20 से ज़्यादा रिटर्न दाखिल करने पड़ते हैं। हर महीने औसतन ₹1.6–1.7 लाख करोड़ का GST संग्रह होने के बावजूद न तो टैक्स स्लैब घटाए गए और न ही आवश्यक वस्तुओं को सस्ता किया गया। ITC रिफंड में महीनों की देरी से व्यापारियों की कार्यशील पूंजी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

वहीं देश में बेरोज़गारी दर आज भी करीब 7–8% बनी हुई है। करोड़ों युवा रोज़गार की तलाश में हैं, लेकिन बजट में प्रत्यक्ष रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस योजना या समयबद्ध लक्ष्य दिखाई नहीं देता। केवल घोषणाओं से युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।

महंगाई की स्थिति भी चिंताजनक है। खुदरा महंगाई दर लगभग 5–6% के आसपास बनी हुई है, जिससे रसोई का बजट बिगड़ चुका है। खाद्य पदार्थ, गैस, दवाइयाँ और रोज़मर्रा की ज़रूरतें आम आदमी की पहुँच से दूर होती जा रही हैं, लेकिन बजट में महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण का कोई स्पष्ट उपाय नहीं दिखता।

कुल मिलाकर, यह बजट GST के ज़रिये अधिक वसूली, बेरोज़गारी पर चुप्पी और महंगाई पर बेबसी का प्रतीक बन गया है। हम इस बजट को आम जनता, छोटे व्यापारियों और युवाओं के हितों के खिलाफ मानते हैं।