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प्रशिक्षित बेरोजगार फार्मासिस्ट मामला पहुंचा कोर्ट, उत्तराखंड शासन को देना होगा 3 हफ्ते मे जवाब, पढ़िये पूरी खबर…

By on January 12, 2022 0 415 Views

देहरादून: प्रशिक्षित बेरोजगार फार्मासिस्ट महासंघ द्धारा 20 दिसम्बर, 2021 के शासनादेश को कोर्ट में चुनौती दी गई है। आज मामले की सुनवाई हुई जिसमे माननीय न्यायालय द्वारा  शासन को 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को आदेशित किया गया है। बताते चलें कि प्रशिक्षित बेरोजगार फार्मासिस्ट नियुक्ति सहित विभिन्न मांगों को लेकर 19 अगस्त 2021 से 135 दिन तक आंदोलनरत रहे। परन्तु भाजपा सरकार की संवेदनहीनता और हठधर्मिता के कारण बेरोजगारों को उनका हक नहीं मिल पाया। उल्टे सरकार द्वारा एक ऐसा आदेश जारी कर दिया गया जिससे 21 वर्षों से रोजगार की राह देख रहे हैं बेरोजगार फार्मासिस्ट का सपना उनकी आंखों के सामने ही चकनाचूर हो गया, साथ ही 2030 तक के लिए भी रोजगार की संभावनाएं समाप्त हो गई। प्रदेश अध्यक्ष महादेव गौड़ के द्वारा बताया गया कि अधिकारों के लिए 135 दिन के महासंघर्ष बाद सरकार द्वारा जो अन्याय किया गया, उसको 21000 बेरोजगार फार्मासिस्टों के द्वारा भुलाया नहीं जा सकता। सरकार द्वारा बेरोजगारों के साथ साथ जन स्वास्थ्य को भी नजरअंदाज किया गया जो कि अत्यंत शर्मनाक है। मौजूदा सरकार के द्वारा 15 वर्षों पूर्व सृजित 536 पदों को समाप्त करने के साथ भविष्य की संभावनाओं पर भी पानी फेर कर बेरोजगारों के साथ घोर अन्याय किया गया। रोजी रोटी छीने जाने से आहत होकर बेरोजगारों के द्वारा 30 दिसंबर को स्वास्थ्य मंत्री और सरकार का पुतलादहन कर चुनावी वहिष्कार किया गया है।

उनके द्वारा बताया गया कि अब न्याय के मंदिर में उपरोक्त बेरोजगार एवम जनविरोधी शासनादेश को लेकर याचिका दाखिल की गई है। उन्होंने चिन्ता जाहिर करते हुए कहा है कि उनके बहुत से साथी अभी भर्ती की अधिकतम आयु सीमा को पार करने की कगार पर है और सरकार की अनीतियों के कारण विभाग में रिक्त पद होने के बावजूद भी उन्हें उनका हक नहीं मिल पाया है। उनके द्वारा स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत पर आरोप लगाया गया कि वह कभी भी बेरोजगार फार्मासिस्टों के मामले में गम्भीर नही दिखे और उनके द्वारा 21000 बेरोजगारों के साथ झूठ बोलकर विश्वासघात किया गया। अब  बेरोजगारों की अन्तिम उम्मीद कोर्ट के फैसले पर ही टिकी है।