October 7, 2026
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कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल में हिमालय और वन्यजीव संरक्षण पर मंथन

By on October 7, 2026 0 5 Views

रामनगर। रामनगर में चल रहे तीन दिवसीय कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल-2026 के दूसरे दिन हिमालय, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण को लेकर विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। देश-विदेश से पहुंचे पर्यावरणविदों, भूगोलवेत्ताओं और वन्यजीव विशेषज्ञों ने हिमालय की पर्यावरणीय संवेदनशीलता और जैव विविधता पर विचार रखे। वहीं, उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी खान-पान और जैविक खेती के महत्व पर भी चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने कहा कि हिमालय केवल बर्फ और पहाड़ों का क्षेत्र नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा और महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र है। वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने और जैव विविधता बचाने के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी से ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया।

फेस्टिवल के दौरान उत्तराखंड के पारंपरिक पहाड़ी भोजन, मोटे अनाज और स्थानीय कृषि पद्धतियों पर भी चर्चा हुई। झंगोरा, कौणी, मंडुवा, गहत और भट्ट की दाल जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों के पोषण महत्व को रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि पहाड़ी खान-पान और जैविक खेती को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार और पलायन रोकने के प्रयासों को मजबूती दी जा सकती है।

इस अवसर पर “Birds of Corbett” पुस्तक का औपचारिक विमोचन भी किया गया। पुस्तक के लेखक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला और मोहम्मद आरिफ अंसारी हैं। पुस्तक को विशेष रूप से युवा पाठकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसमें चित्रों और सरल भाषा के माध्यम से कॉर्बेट के पक्षियों और जैव विविधता से परिचित कराया गया है।

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना ग्रेवाल ने कहा कि कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल के जरिए साहित्य, प्रकृति, वन्यजीव, संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से लोगों को कॉर्बेट की प्राकृतिक संपदा और संरक्षण प्रयासों को करीब से समझने का अवसर मिलता है।

वहीं, वन्यजीव सप्ताह-2026 के तहत कालागढ़ स्थित कॉर्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में “मानव-वन्यजीव संघर्ष” विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारणों, प्रभावों और इसे कम करने के उपायों पर अपने विचार रखे।

शाम को वन विश्राम भवन रामनगर में स्कूली छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इसके बाद कठपुतली कार्यक्रम के माध्यम से मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।

कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल के जरिए साहित्य और प्रकृति के बीच संवाद स्थापित करने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।