October 17, 2026
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उत्तराखंड: 5 हजार सरकारी स्कूल बंद होने की कगार पर ! नेताप्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मांगा सरकार से जवाब…

By on August 31, 2026 0 34 Views

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब पांच हजार सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ऐसे हैं, जहां छात्र संख्या 10 या उससे कम रह गई है। इनमें 4,275 प्राथमिक विद्यालय और करीब 650 जूनियर हाईस्कूल शामिल हैं। आर्य ने कहा कि कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या महज एक, तीन या चार रह जाना सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

उन्होंने सवाल उठाया कि करीब 12 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक शिक्षा बजट के बावजूद सरकारी विद्यालयों में नामांकन लगातार क्यों घट रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों की संख्या का मामला नहीं, बल्कि शिक्षक उपलब्धता, विद्यालय भवन, शौचालय, पेयजल, बिजली, प्रयोगशाला, डिजिटल सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर सवाल है।

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से 30 दिनों के भीतर प्रत्येक सरकारी विद्यालय की छात्र संख्या, 10 या उससे कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों, पिछले पांच वर्षों में बंद अथवा विलय किए गए स्कूलों और स्वीकृत बनाम कार्यरत शिक्षकों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कम नामांकन वाले विद्यालयों के लिए विद्यालयवार पुनर्जीवन योजना और स्कूल बंद या विलय करने के मानकों एवं प्रक्रिया को भी सार्वजनिक करने को कहा।

आर्य ने कहा कि स्कूल बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। सरकार को पहले उन कारणों को खत्म करना चाहिए, जिनकी वजह से बच्चे सरकारी विद्यालय छोड़कर निजी स्कूलों की ओर जा रहे हैं। उन्होंने कम नामांकन वाले प्रत्येक विद्यालय के लिए विशेष पुनर्जीवन पैकेज, पर्याप्त शिक्षक, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए स्थानीय जरूरत के अनुसार शिक्षा मॉडल लागू करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि पर्वतीय उत्तराखंड में सरकारी विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि गांवों के सामाजिक अस्तित्व का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। किसी भी विद्यालय को बंद या विलय करने से पहले संबंधित ग्रामसभा, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की राय लेना जरूरी होना चाहिए। आर्य ने कहा कि सरकार को प्रचार नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के परिणाम का हिसाब देना होगा। सरकार को अब बयान नहीं, जवाब देना होगा और यदि शिक्षा नीति विफल हुई है तो जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।