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कांग्रेस मे नहीं थम रहा हार के बाद बवाल, नवप्रभात बोले, अपने ही लोग मिल गए BJP से, उधर खुलकर सामने आये कुंजवाल…
देहरादून: चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के अंदर भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा। अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कुंजवाल ने अपने ही प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस को संगठनात्मक कमजोरी के कारण हार का मुंह देखना पड़ा। इससे पूर्व सीएम चेहरे को लेकर खींचतान चल रही थी। उसके बाद सीटों का बंटवारा लेकर घमासान मचा रहा। चुनाव परिणाम आने के बाद पार्टी में कलह एकदम सतह पर आ गई है। अब टिकट के बेचने से लेकर हार का ठीकरा व भितरघात तक के आरोप एक-दूसरे पर लग रहे हैं। चुनाव में हार का ठीकरा कांग्रेस एक दूसरे में फोड़ने में लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंजवाल के बयानों से सियासी हल्कों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। पूर्व विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव से पूर्व संगठनात्मक बदलाव किया। कांग्रेस ने गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। प्रदेश अध्यक्ष तो बदल दिया गया लेकिन अन्य टीम को नहीं बदला गया।
अध्यक्ष के अलावा संगठन में अन्य पदों पर आसीन लोग वही थे जो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के समय में थे। जब बदलाव होना था तो जिले स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक ढांचे को बदला जाना चाहिए था। लेकिन प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अलावा संगठन में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया। यही कांग्रेस की असली हार का कारण बना। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल का संगठन पर किसी का नियंत्रण नहीं था। अलग-अलग लोग अपने अपने तरीके से संगठन को चला रहे थे। जिस कारण कांग्रेस को प्रदेश में पराजय का मुंह देखना पड़ा। उन्होंने संगठन की मजबूती पर भी जोर नही दिया। उन्होंने कहा कि अगर आने वाले चुनाव में कांग्रेस ने बेहतर काम करना है तो संगठन को मजबूत करना पड़ेगा और किसी भी प्रकार की गुटबाजी से दूर रहना पड़ेगा।
अपने ही लोगों ने भाजपा से मिलकर पार्टी को हराया – नवप्रभात
उधर कांग्रेस नेता नव प्रभात का विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार को लेकर बयान सामने आया है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, प्रभात ने कहा, “विधानसभा चुनाव में हार के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कहीं-कहीं पार्टी के कुछ उम्मीदवारों ने भाजपा उम्मीदवारों की मदद की। गुटबाजी हावी नहीं होनी चाहिए। केवल औपचारिक समीक्षा बैठक ही नहीं, बल्कि गहन समीक्षा इस समय की मांग है।” बता दें कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के चलते कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पांचों राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफा मांगा था, ताकि कांग्रेस कमेटी का पुनर्गठन हो सके।

