September 12, 2026
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उत्तराखंड: चुनावी तैयारी के साथ आत्ममंथन में जुटी भाजपा, कमजोर सीटों और विधायकों के प्रदर्शन पर खास नजर

By on May 11, 2026 0 63 Views

देहरादून। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है। पार्टी अब केवल विपक्ष के खिलाफ रणनीति बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने विधायकों और संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन भी कर रही है। इसी कड़ी में भाजपा के प्रशिक्षण वर्गों के जरिए विधायकों के कामकाज और क्षेत्रीय सक्रियता का फीडबैक जुटाया जा रहा है।

भाजपा के मंडल स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं, जबकि अब जनपद स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और जनसंपर्क के साथ-साथ विधायकों के कार्यों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी द्वारा विधायकों की पांच वर्षों की कार्यशैली, जनता से संवाद, संगठन के साथ तालमेल और विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता को लेकर विस्तृत फीडबैक तैयार किया जा रहा है। इस रिपोर्ट को 20 मई के बाद आयोजित होने वाले प्रांतीय प्रशिक्षण वर्ग में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।

राजनीतिक गलियारों में इसे भाजपा विधायकों का “ग्राउंड रियलिटी चेक” माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया से कई जनप्रतिनिधियों की वास्तविक स्थिति पार्टी नेतृत्व के सामने स्पष्ट होगी।

संघ भी जुटा रहा अलग फीडबैक

भाजपा के समानांतर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपने स्तर पर जनप्रतिनिधियों के कार्यों को लेकर जानकारी जुटा रहा है। संघ से जुड़े विभिन्न संगठन और स्थानीय नेटवर्क विधायकों की सामाजिक स्वीकार्यता, क्षेत्रीय पकड़ और संगठन के साथ समन्वय को लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

भाजपा के अंदर संघ की फीडबैक रिपोर्ट को हमेशा महत्वपूर्ण माना जाता है और चुनावी रणनीति तय करने में इसका प्रभाव भी देखने को मिलता है।

कम अंतर वाली सीटों पर सबसे ज्यादा फोकस

भाजपा विशेष रूप से उन विधानसभा सीटों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जहां 2022 के चुनाव में पार्टी कम अंतर से जीत दर्ज कर पाई थी। पार्टी इन सीटों को संवेदनशील श्रेणी में मानते हुए संगठनात्मक मजबूती और जनसंपर्क बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।

पार्टी का मानना है कि लगातार चुनावी सफलता के लिए समय-समय पर आत्ममंथन और जमीनी समीक्षा जरूरी है। यही वजह है कि इस बार प्रशिक्षण वर्गों को केवल संगठनात्मक कार्यक्रम न मानकर राजनीतिक मूल्यांकन का माध्यम भी बनाया गया है।