आई.एफ.एस. प्रशिक्षार्थियों ने किया कार्बेट टाइगर रिजर्व का शैक्षणिक भ्रमण
रामनगर। भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के प्रशिक्षार्थियों के एक दल ने 8 एवं 9 जून 2026 को Corbett Tiger Reserve का शैक्षणिक एवं अध्ययन भ्रमण किया। भ्रमण का उद्देश्य प्रशिक्षार्थियों को वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास प्रबंधन, निगरानी व्यवस्था तथा पर्यटन प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था।
कार्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर Dr. Saket Badola के निर्देशन में आयोजित इस भ्रमण के पहले दिन प्रशिक्षार्थियों ने लालढांग ग्रासलैंड क्षेत्र का दौरा किया। यहां उन्हें ग्रासलैंड प्रबंधन, वन्यजीव आवास संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। साथ ही विभागीय हाथियों के संरक्षण, प्रशिक्षण और वन्यजीव प्रबंधन में उनकी भूमिका से भी अवगत कराया गया।
दूसरे दिन प्रशिक्षार्थियों ने धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर का भ्रमण किया, जहां उन्हें कार्बेट के इतिहास, जैव विविधता, वन पारिस्थितिकी तथा संरक्षण गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके बाद धनगढ़ी स्थित नेचर शॉप में स्थानीय समुदाय की सहभागिता एवं प्रकृति संरक्षण जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी साझा की गई।
प्रशिक्षार्थियों ने कार्बेट मुख्यालय स्थित टाइगर सेल का भी निरीक्षण किया, जहां आधुनिक सर्विलांस कैमरों, तकनीकी संसाधनों तथा एम-एस्ट्राइप्स (M-STrIPES) प्रणाली के माध्यम से वन्यजीव निगरानी और पेट्रोलिंग की प्रक्रिया को समझा। पार्क वार्डन Binder Pal तथा टाइगर सेल प्रभारी Prema Tiwari ने निगरानी व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी।
इसके पश्चात कार्बेट टाइगर रिजर्व सभागार में आयोजित विशेष प्रस्तुतीकरण में उप निदेशक Rahul Mishra ने वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, ग्रासलैंड प्रबंधन, फुट एवं एम-एस्ट्राइप्स पेट्रोलिंग, मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा पर्यटन प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित संवादात्मक सत्र में प्रशिक्षार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा विशेषज्ञ अधिकारियों से विभिन्न विषयों पर चर्चा की। प्रशिक्षार्थियों ने कार्बेट टाइगर रिजर्व में संचालित संरक्षण गतिविधियों, तकनीकी नवाचारों और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्थाओं की सराहना की।
यह अध्ययन भ्रमण प्रशिक्षार्थियों के लिए वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन के व्यावहारिक पहलुओं को समझने तथा भविष्य में प्रभावी वन प्रशासन के लिए आवश्यक अनुभव प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।

