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सतत विकास और हरित नवाचार पर संगोष्ठी का आयोजन (विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी का रामनगर महाविद्यालय में हुआ आयोजन)

By on June 5, 2026 0 10 Views

रामनगर।आज दिनांक 4 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सेंटर फॉर वोकेशनल स्टडीज के तत्वाधान में, ” सतत विकास एवं हरित नवाचार, ” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसके अंतर्गत महाविद्यालय में संचालित हो रहे विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में पर्यावरण संरक्षण हरित नवाचार के बदलते परिदृश्य में आवश्यक परिवर्तन, तथा वर्तमान में योग की आवश्यकता पर विचार विमर्श किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. कृष्णा भारती (संयोजक इको टूरिज्म) के द्वारा कार्यक्रम की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की गई एवं महाविद्यालय में संचालित हो रहे सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की संक्षिप्त जानकारी दी गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य प्रोफेसर एम.सी.पाण्डे ने कहा कि हम अपने सभी व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बदलते समय एवं बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार समृद्ध बनाना चाहते हैं, जिससे कि हम समाज से सीधे जुड़कर युवाओं को रोजगारपरक पाठ्यक्रम का लाभ दे सके। मुख्य अतिथि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के एसडीओ बिंदर पाल ने ईको टूरिज्म और टूरिज्म के मध्य के अंतर को बताते हुए कहा कि अब ईको टूरिज्म आज की आवश्यकता है जो कि मानव के सतत विकास में आवश्यक भूमिका निभा रहा है। पर्यटन के विद्यार्थियों को भारतीय वन्य जीव अनुसंधान संस्थान में भ्रमण कराया जाना चाहिए जिससे उनमें जीव एवं पर्यावरण के मध्य उचित संतुलन को स्थापित किया जा सके। विशिष्ट अतिथि राजीव शाह, अध्यक्ष कॉबेट जी एम संगठन ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के माध्यम से विद्यार्थी रोजगार पर्यटन संगठन से जुड़ सकते हैं। इन्होंने इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग कराये जाने पर विशेष बल दिया। टैक्स एडवोकेट चन्द्र पूरन पाण्डे एवं अंकित अग्रवाल ने वर्तमान में प्राकृतिक संसाधनों का उचित दोहन करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने हरित नवाचार के अंतर्गत अपशिष्ट प्रबंधन को पर्यावरण के संरक्षण हेतु आवश्यक कदम बताया। इन्होंने सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान अधिक अपनाई जाने पर जोर दिया। वन क्षेत्र अधिकारी ललित मोहन ने कहा कि वन विभाग द्वारा नेचर गाइड की भर्ती में लगभग 25 प्रतिशत विद्यार्थी महाविद्यालय से पर्यटन का डिप्लोमा प्राप्त ही चयनित किए जाते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से इन समस्त पाठ्यक्रमों को प्रसारित व प्रचारित करना चाहिए जिससे महाविद्यालय लाभान्वित हो सके। संगोष्ठी में योग की महत्ता पर विशेष चर्चा की गई। पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष गणेश रावत ने बीसीए, एमबीए,बायोटेक्नोलॉजी,बायोइंफार्मेटिक्स एवं एआई सम्बन्धित पाठ्यक्रमों को भी महाविद्यालय में लाने का प्रस्ताव रखा। वक्ताओं
ने कहा कि योग स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन तथा कार्यक्षमता को बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। स्वस्थ एवं जागरूक नागरिक ही सतत विकास के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकते हैं। विद्यार्थियों को नियमित योगाभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके साथ ही कम्प्यूटरीकृत लेखांकन व ऑफिस मैनेजम्ब के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल युग में टैली, जीएसटी, ई-फाइलिंग तथा आधुनिक लेखांकन प्रणालियों का ज्ञान युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित कर रहा है। विद्यार्थियों को बताया गया कि कम्प्यूटरीकृत लेखांकन का प्रशिक्षण उन्हें निजी क्षेत्र, उद्योगों तथा स्वरोजगार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान कर सकता है। अंत में महाविद्यालय के के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एस एस मौर्य द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम में कुलदीप अग्रवाल,अनुज पंत,डॉ.पुनीता कुशवाहा, डॉ.लोतिका अमित, डॉ. मूलचंद शुक्ल, डॉ.ममता भदोला जोशी,डॉ.पवन टम्टा, डॉ.शिप्रा पंत, डॉ. अनुराग श्रीवास्तव,डॉ.डी एन. जोशी व डॉ.गरिमा पाण्डे आदि मौजूद रहे।