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जानें क्यों पत्नियां रखती हैं करवा चौथ का व्रत ? च्रंद्र दर्शन के समय रखें इन बातों का ध्यान…

By on October 13, 2022 0 206 Views

न्यूज़ डेस्क करवा चाैथ का व्रत इस साल 13 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना हेतु पूरे दिन व्रत रखती हैं। विभिन्न पौराणिक कथाओं के अनुसार करवाचौथ के व्रत का उद्गम उस समय हुआ था जब देवों और दानवों के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था और युद्ध में देवता परास्त होते नजर आ रहे थे। ऐसे में देवताओं ने ब्रह्मा जी से इसका कोई उपाय करने की प्रार्थना की। ब्रह्मा जी ने देवताओं की करुण पुकार सुनकर उन्हें सलाह दी कि अगर आप सभी देवों की पत्नियां सच्चे और पवित्र हृदय से अपने पतियों के लिए प्रार्थना एवं उपवास करें तो देवता दैत्यों को परास्त करने में सफल होंगे।ब्रह्मा जी की सलाह मानकर सभी देव पत्नियों ने कार्तिक मास की चतुर्थी को व्रत किया और रात्रि के समय चंद्रोदय से पहले ही देवता युद्ध जीत गये। ऐसे में चंद्रोदय के पश्चात दिन भर से भूखी प्यासी देव पत्नियों ने अपना व्रत खोला।ऐसी मान्यता है कि तभी से करवा चौथ व्रत किये जाने की परंपरा शुरू हुई।

पूजन विधि

इस दिन व्रती स्त्रियों को प्रात:काल स्नानादि के बाद “मम् सुख सौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर प्राप्तये करक चतुर्थी व्रत महं करिष्ये” पति, पुत्र-पौत्र तथा सुख सौभाग्य की इच्छा का संकल्प लेकर यह व्रत करना चाहिए। इस व्रत में शिव-पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चन्द्रमा का पूजन करके अर्घ्य देकर ही जल, भोजन ग्रहण करना चाहिए। चन्द्रोदय के कुछ पूर्व एक पटले पर कपड़ा बिछाकर उस पर मिट्टी से शिवजी, पार्वती जी, कार्तिकेय जी और चन्द्रमा की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाकर अथवा करवाचौथ के छपे चित्र लगाकर कर पटले के पास पानी से भरा लोटा और करवा रख कर करवाचौथ की कहानी सुनी जाती है। कहानी सुनने से पूर्व करवे पर रोली से एक सतिया बना कर उस पर रोली से 13 बिन्दियां लगाई जाती हैं। हाथ पर गेहूं के 13 दाने लेकर कथा सुनी जाती है और चांद निकल आने पर उसे अर्घ्य देकर स्त्रियां भोजन करती हैं।

चन्द्र दर्शन के समय क्या करें

चन्द्रमा निकलने से पूर्व पूजा स्थल रंगोली से सजाया जाता है तथा एक करवा टोटीदार उरई की पांच या सात सींक डालकर रखा जाता है। करवा मिट्टी का होता है, यदि पहली बार करवाचौथ चांदी या सोने के करवे से पूजा जाये तो हर बार उसी की पूजा होती है, फिर रात्रि में चन्द्रमा निकलने पर चन्द्र दर्शन कर अर्घ्य दिया जाता है। चन्द्रमा के समक्ष निरन्तर धार छोड़ी जाती है तथा सुहाग और समृद्धि की कामनी की जाती है। इसके बाद बड़ों का आशीर्वाद लेकर व्रत खोला जाता है।

उजमन
वहीं अन्य व्रतों के साथ इस करवाचौथ का उजमन किया जाता है। इसमें 13 सुहागनों को भोजन कराने के बाद उनके माथे पर बिन्दी लगाकर और सुहाग की वस्तुऐं एवं दक्षिणा देकर विदा कर दिया जाता है।