राजधानी सहित प्रदेशभर में दिखने लगा तीसरी लहर का खौफ।
भोपाल। राजधानी सहित प्रदेशभर में तीसरी लहर का खौफ लोगों में दिखने लगा है। ऐसे में लोग अब वैक्सीन लगवाने के लिए तत्पर हो रहे हैं। लोग अब प्राइवेट वैक्सीनेशन की तरफ रुख कर रहे हैं। शहर के प्राइवेट अस्पतालों में रोज 500 लोगों को वैक्सीन लग रही है। पहले से रखा स्टॉक तेजी से इस्तेमाल होने लगा है। अभी पांच अस्पतालों मिरेकल, चिरायु, हजेला, पीपुल्स और सिद्धी विनायक में ही प्राइवेट वैक्सीनेशन किया जा रहा है। इस बदलाव के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। गौरतलब है कि भोपाल के अस्पतालों में दस दिन पहले तक कुल क्षमता के पांच प्रतिशत डोज ही इस्तेमाल हो पाते थे, लेकिन अब 60 प्रतिशत इस्तेमाल हो रहे हैं। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से प्राइवेट अस्पतालों के लिए तय की गई लोगों की संख्या 25 प्रतिशत से कम है। लेकिन, आने वाले समय में क्षमता 25 फीसदी तक पहुंच जाएगी। करोड़ों में संक्रमितों की संख्या और मौत का आंकड़ा चार लाख के पार जाने के बाद कोई भी यह सोचेगा कि भारतीय कोरोना वायरस की भयावता को जानते हैं। कहा जा रहा होगा कि देश में लोग कोविड संबंधी व्यवहार, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी नियमों का पालन कर रहे होंगे, लेकिन
जमीनी हकीकत से यह तथ्य मेल नहीं खाते। दूसरी लहर हमें महामारी के सबसे बुरा दौर देखने के बाद भी लोगों के बीच खौफ नहीं है। तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए तेज टीकाकरण, लोगों के बीच संकोच को खत्म करने जैसे संघर्ष जारी है। इसी बीच हिल स्टेशनल, बाजार, मॉल जैसी जगहों पर खतरों को दरकिनार कर धड़ल्ले से नियमों का उल्लंघन भी चल रहा है। एक्सपर्ट भी इस बात की चेतावनी दे चुके हैं कि अगर कोविड संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ, तो तीसरी लहर छ-आठ हफ्तों में आ सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अधिकांश लोग भीड़-भाड़ से बचना चाहते हैं। साथ ही अपनी वैक्सीन समय पर लगवाना चाहते हैं। कई लोगों को विदेश जाना है, तो कई
लोगों को समय की चिंता सता रही है। इतना ही नहीं, कई लोग एलर्जी समेत ऐसी बीमारियों से ग्रसित हैं, जिनको लेकर वे सरकारी वैक्सीन सेंटर नहीं जाना चाहते। कोरोना से बचने के लिए भी कई लोग प्राइवेट वैक्सीन सेंटर की तरफ रुख कर रहे हैं।

