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शहादत दिवस पर याद किये गए प्रसिद्ध क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद

By on February 27, 2022 0 242 Views

रामनगर। प्रसिद्ध क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद के शहादत दिव्सनपर आज उन्हें ज्योतिबा फुले सांयकालीन स्कूल व सावित्रीबाई फुले सांयकालीन स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से याद किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत बच्चों द्वारणप्रस्तुत विभिन्न देशभक्ति गीतों से हुई।उसके बाद विद्यालय की शिक्षिका अंजलि रावत व शिक्षिक सुमित कुमार ने उनके जीवन के बारे में जानकारी देते हुए बताया,
23 जुलाई 1906 में जन्मे चंद्रशेखर के “आजाद” होने की कथा तो किवदंती की तरह प्रचलित है. 1921 में 15 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन के दौरान चन्द्रशेखर गिरफ्तार हुए तो मजिस्ट्रेट के पूछने पर उन्होंने अपना नाम- आजाद, पिता का नाम-स्वाधीनता और घर-जेलखाना बताया. यह अलग बात है कि क्रांतिकारी आंदोलन में शरीक होने के बाद न तो वे कभी गिरफ्तार हुए और ना ही जेल गए.
उनके क्रांतिकारी जीवन व क्रांतिकारी गतिविधियों पर बातचीत रखते हुए रचनात्मक शिक्षक मण्डल के राज्य संयोजक नवेन्दु मठपाल ने कहा चन्द्रशेखर आजाद, भारत के क्रांतिकारी आंदोलन की दो पीढ़ियों के साथ काम करने वाले नेता थे. वे 1922 में क्रांतिकारी आंदोलन में शरीक हुए थे, जब इस आंदोलन के नेता रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक़उल्ला खान आदि थे।1925 में काकोरी कांड के बाद हुई धरपकड़ और गिरफ्तारियों में जो लोग पुलिस के हत्थे नहीं चढ़े आजाद उनके अगुवा थे.पुलिस को छकाने का यह सिलसिला आजाद के जीवन पर्यंत चला.
आजाद वेश बदलने और भूमिगत हो जाने की कला में माहिर थे. विश्वनाथ वैशम्पायन द्वारा लिखित पुस्तक- अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद में आजाद के जीवन के विविध पहलुओं पर तफसील से चर्चा हुई है. उसी में उनके विभिन्न रूप बदलने और अलग-अलग जगह शेल्टर बनाने के कई किस्से हैं. क्रांतिकारी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए आजाद ने ट्रक ड्राईवर से लेकर सन्यासी तक के कई वेश धरे और मठों से लेकर राजमहलों तक को अपना आश्रय स्थल बनाया.
आजाद क्रांतिकारी दल के सेनापति थे.
विश्वनाथ वैशम्पायन, मन्मथनाथ गुप्त और शिव वर्मा ने अपने संस्मरणों में लिखा है कि आजाद की औपचारिक शिक्षा बहुत नहीं हुई थी. लेकिन अध्ययनशीलता उनमें काफी थी. भगत सिंह, भगवती चरण वोहरा आदि तो काफी पढ़े-लिखे थे, जिनकी अंग्रेजी पर खूब पकड़ थी. ये दल के सिद्धांतकार भी थे. वैशम्पायन ने लिखा है कि आजाद पहले औरों से अंग्रेजी में लिखा हुआ पढ़वाते थे और फिर उसका अर्थ समझते थे. बाद में अभ्यास से वे खुद भी अंग्रेजी पढ़ना सीख गए थे.
भारत के क्रांतिकारी आंदोलन के दल की हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से लेकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन तक की यात्रा के आजाद अग्रणी नेता थे.बिस्मिल के समय से दल का नाम हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन था. 7-8 सितंबर 1928 को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में देश भर के क्रांतिकारियों की बैठक में भगत सिंह ने दल का नाम हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन करने का प्रस्ताव रखा. बैठक के बाद ही दल को सैन्य विभाग और संगठन विभाग में बांटा गया और आजाद सैन्य विभाग यानि हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के सेनापति बनाए गए.
27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क में जिस पेड़ के पीछे से आजाद अंग्रेजों का मुक़ाबला करते हुए शहीद हो गए, उस पेड़ पर लोगों ने आजाद लिख दिया. पार्क को विश्वविद्यालय के छात्रों ने आजाद पार्क कहना शुरू कर दिया. लोग उस पेड़ के नीचे फूलमाला चढ़ाने लगे तो अंग्रेजों ने वह पेड़ ही कटवा डाला. बाद में वहाँ पर पुनः जामुन का पेड़ लगाया गया।बच्चों ने चन्द्रशेखर आजाद का चित्र भी बनाया।इस मौके पर ग्राम प्रधान मो ताहिर,आरजू सैफी, अरसी,प्रभात कुमार समेत बड़ी संख्या में बच्चे मौजूद रहे।