कारगिल विजय दिवस पर सीएम धामी का बड़ा ऐलान, परमवीर चक्र विजेताओं की अनुग्रह राशि ₹2 करोड़
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कारगिल विजय दिवस (शौर्य दिवस) के अवसर पर देहरादून के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने कारगिल शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया और उनके अद्वितीय त्याग, शौर्य एवं राष्ट्रसेवा को नमन किया। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि परमवीर चक्र से सम्मानित वीरों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹1.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹2 करोड़ की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, अटूट मनोबल और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है। उन्होंने कहा कि 18 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बेहद कठिन परिस्थितियों में भारतीय सैनिकों ने अद्वितीय वीरता का परिचय देते हुए दुश्मन को परास्त किया और विश्व के सामने भारत की सैन्य शक्ति का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में देश के 527 वीर सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, जिनमें उत्तराखंड के 75 वीर सपूत शामिल थे। उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है और यहां की गौरवशाली सैन्य परंपरा पूरे देश के लिए प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की मजबूत होती सुरक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई, सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे का विकास, ‘वन रैंक-वन पेंशन’, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत जैसे कदम सैनिकों के सम्मान और देश की सुरक्षा को नई मजबूती दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। राज्य सरकार ने शहीदों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी है। साथ ही वीरता पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सहायता राशि में भी ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, आवेदन की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष, शहीद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए सहायता, वीरता पुरस्कार विजेताओं को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा, सेवारत और पूर्व सैनिकों को संपत्ति खरीद पर स्टाम्प शुल्क में छूट जैसी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की गई हैं। साथ ही पूर्व सैनिकों के शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है और भूमि धोखाधड़ी से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि देहरादून के गुनियाल गांव में राज्य के ‘पांचवें धाम’ के रूप में सैन्य धाम का निर्माण अंतिम चरण में है। प्रत्येक शहीद के घर से लाई गई पवित्र मिट्टी से बन रहा यह धाम आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति और बलिदान की प्रेरणा देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवामुक्त अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए देश का पहला ‘अग्निवीर रोजगार सेल’ गठित किया जा रहा है। इसके अलावा उत्तराखंड पुलिस, वन विभाग और अन्य राज्य सेवाओं में उन्हें प्राथमिकता, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार, होमस्टे योजना और सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
कार्यक्रम में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने भी कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित किया जा चुका है।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, दायित्वधारी सुभाष बड़थ्वाल, सैनिक कल्याण सचिव युगल किशोर पंत, मेजर जनरल सम्मी सबरवाल (से.नि.), जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोभाल, पूर्व सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक एवं शहीदों के परिजन सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

