September 8, 2026
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रामनगर में महिला आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी पुष्कर सोसायटी, सरकार से सहयोग और बाजार उपलब्ध कराने की उम्मीद, हुनर को पहचान, रोजगार की उड़ान—200 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार का प्रशिक्षण

By on September 8, 2026 0 3 Views

रामनगर। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में रामनगर की पुष्कर सोसायटी लगातार प्रयास कर रही है। संस्था से जुड़ी महिलाओं के हुनर को बाजार उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को ऑनलाइन माध्यम से अधिक लोगों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है।

वर्ष 2023 में महज सात सदस्यों के साथ पंजीकृत हुई पुष्कर सोसायटी अब तक 200 से अधिक महिलाओं को विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दे चुकी है। संस्था का उद्देश्य महिलाओं को हुनरमंद बनाने के साथ-साथ उन्हें रोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सोसायटी से जुड़ी महिलाएं अचार-मुरब्बे, चटनी-पापड़, हैंडबैग, कॉटन डॉल्स, क्रोशिया, खिलौने, मंडला आर्ट, ऐपण पेंटिंग, साबुन-कैंडल मेकिंग, रेजिन आर्ट, कैनवास पेंटिंग, फ्लावर मेकिंग, सिलाई-कढ़ाई, मेहंदी, पार्लर और बुनाई जैसे कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं।

संस्था की अध्यक्ष पूनम गुप्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों से महिला उद्यमियों को नई उम्मीद मिली है। रामनगर में पहली बार आयोजित सरस मेले को भी वह स्थानीय महिला उद्यमियों के लिए बेहतर मंच मानती हैं।

हालांकि पुष्कर सोसायटी को अभी तक सरकारी स्तर पर किसी विशेष सहायता का लाभ नहीं मिला है, लेकिन संस्था को उम्मीद है कि आने वाले समय में सरकार की आत्मनिर्भर उत्तराखंड और महिला सशक्तिकरण की मुहिम से जुड़कर सोसायटियों और एनजीओ को भी अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।

सोसायटी की ओर से सरकार से मांग की गई है कि भविष्य में सरस मेले और अन्य आयोजनों में महिला उद्यमियों को निःशुल्क स्टॉल, स्थानीय कलाकारों को मंच और आयोजनों की पूर्व सूचना उपलब्ध कराई जाए, ताकि महिलाएं समय रहते अपने उत्पाद तैयार कर सकें और उन्हें व्यापक बाजार मिल सके।

पुष्कर सोसायटी की पहल यह संदेश देती है कि यदि स्थानीय महिलाओं को सही प्रशिक्षण, बाजार और अवसर उपलब्ध कराया जाए, तो उनका हुनर न केवल परिवार की आय बढ़ा सकता है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।