September 10, 2026
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लालकुआँ में सर्वदलीय जनसभा — बिंदुखत्ता को तत्काल राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग, नेता प्रतिपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

By on February 18, 2026 0 94 Views

लालकुआँ: लालकुआँ में आयोजित विशाल सर्वदलीय जनसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए स्पष्ट घोषणा की कि बिंदुखत्ता को तत्काल प्रभाव से राजस्व ग्राम घोषित किया जाए तथा वर्षों से बसे प्रत्येक परिवार को व्यक्तिगत भूमिधरी अधिकार प्रदान किए जाएँ।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में केंद्र सरकार द्वारा पारित अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (वनाधिकार कानून) का मूल उद्देश्य ही यह था कि पीढ़ियों से वनों में निवास कर रहे लोगों को व्यक्तिगत एवं सामूहिक अधिकार दिए जाएँ, जिनमें राजस्व ग्राम का दर्जा भी शामिल है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कानून लागू होने के बावजूद बिंदुखत्ता के लोगों को अब तक उनका अधिकार नहीं मिल सका।

नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि ग्राम एवं ब्लॉक स्तरीय समितियों की सकारात्मक संस्तुति के बावजूद प्रशासन ने जानबूझकर प्रक्रिया को लंबित रखा है। उनका कहना था कि जिलाधिकारी, नैनीताल को वनाधिकार कानून के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्वयं राजस्व ग्राम की घोषणा करनी चाहिए थी, किंतु फाइल शासन को प्रेषित कर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। यह केवल प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि सरकार की हठधर्मिता और जनविरोधी मानसिकता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि लगभग दो सौ वर्षों से भूमिधरी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे बिंदुखत्ता के स्थानीय निवासी, जिनमें बड़ी संख्या पूर्व सैनिकों की है, आज भी अपने अधिकारों के लिए भटकने को मजबूर हैं। जनसभा में उमड़ा जनसैलाब सरकार के लिए स्पष्ट संदेश है कि अब जनता अन्याय सहन नहीं करेगी।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में कई बार उठाया, लेकिन सरकार ने हर बार टालमटोल की नीति अपनाई। तराई से लेकर पर्वतीय जिलों तक वनाधिकार से जुड़े हजारों प्रकरण लंबित हैं। यदि शीघ्र न्यायपूर्ण निर्णय नहीं लिया गया तो व्यापक जनांदोलन अपरिहार्य होगा।

उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा

“बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि जनता के सम्मान, अस्तित्व और संवैधानिक अधिकारों का प्रश्न है। यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो जनता अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और निर्णायक संघर्ष के लिए बाध्य होगी।”

अंत में उन्होंने कहा कि यह किसी प्रकार की चेतावनी नहीं, बल्कि जनभावनाओं की स्पष्ट अभिव्यक्ति है। अब निर्णय सरकार को लेना है—न्याय के साथ या जनआक्रोश के साथ।