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उत्तराखंड बीजेपी में गढ़वाल का बढ़ता दबदबा, पौड़ी बना सियासी पावर सेंटर….

By on August 18, 2026 0 12 Views

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर गढ़वाल और कुमाऊं के राजनीतिक संतुलन को लेकर चर्चा तेज है। सरकार से लेकर प्रदेश संगठन और अब भाजपा के केंद्रीय संगठन में उत्तराखंड के नेताओं को मिली जिम्मेदारियों को देखें तो गढ़वाल, खासतौर पर पौड़ी गढ़वाल, का राजनीतिक प्रभाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

राज्य सरकार में गढ़वाल क्षेत्र के कई बड़े नेता महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वहीं प्रदेश संगठन और केंद्रीय संगठन में भी पौड़ी से जुड़े नेताओं की मजबूत मौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

सरकार में गढ़वाल के कई बड़े चेहरे

राज्य सरकार में गढ़वाल क्षेत्र के कई प्रभावशाली नेता मंत्री पद पर हैं। सतपाल महाराज, गणेश जोशी, धन सिंह रावत, सुबोध उनियाल, मदन कौशिक, भारत चौधरी और प्रदीप बत्रा जैसे नेताओं की सरकार में अहम भूमिका है। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कुमाऊं से आते हैं और रेखा आर्य तथा राम सिंह कैड़ा जैसे नेता भी सरकार में कुमाऊं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

केंद्रीय संगठन में पौड़ी के तीन चेहरे

भाजपा के केंद्रीय संगठन में नितिन नवीन की टीम में उत्तराखंड से जिन नेताओं को जिम्मेदारी मिली है, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और आलोक भट्ट शामिल हैं। तीनों का संबंध पौड़ी गढ़वाल से बताया जा रहा है।

ऐसे में सरकार, प्रदेश संगठन और केंद्रीय संगठन में पौड़ी से जुड़े नेताओं की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा स्वाभाविक है। राजनीतिक जानकार जय सिंह रावत का मानना है कि गढ़वाल को लेकर पार्टी का फोकस बढ़ा है। उनके मुताबिक संगठन को पता है कि गढ़वाल में नुकसान होने पर चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

पौड़ी लोकसभा क्षेत्र पर खास नजर

पौड़ी लोकसभा क्षेत्र इस समय भाजपा के राजनीतिक समीकरणों में खास महत्व रखता दिखाई दे रहा है। सतपाल महाराज, धन सिंह रावत और भारत चौधरी जैसे प्रभावशाली नेता इस क्षेत्र से जुड़े हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट का भी संबंध पौड़ी लोकसभा क्षेत्र से है।

इसके अलावा राज्यसभा में नरेश बंसल और महेंद्र भट्ट उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस तरह राज्य सरकार, प्रदेश संगठन, राज्यसभा और केंद्रीय संगठन में गढ़वाल से जुड़े नेताओं की मौजूदगी एक बड़े राजनीतिक नेटवर्क की ओर इशारा करती है।

कुमाऊं को नजरअंदाज करना आसान नहीं

हालांकि उत्तराखंड भाजपा की पूरी तस्वीर को केवल गढ़वाल के दबदबे के तौर पर देखना सही नहीं होगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कुमाऊं से आते हैं। सरकार में रेखा आर्य और राम सिंह कैड़ा जैसे नेताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों का संतुलन हमेशा महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने दोनों क्षेत्रों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी।

2027 से पहले क्या बन रहा नया समीकरण?

भाजपा लगातार दो बार सत्ता में वापसी कर चुकी है और अब उसके सामने 2027 में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की चुनौती है। ऐसे में पार्टी के लिए गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों का राजनीतिक संतुलन बेहद अहम होगा।

मौजूदा परिस्थितियों में गढ़वाल, विशेषकर पौड़ी गढ़वाल, भाजपा के लिए मजबूत राजनीतिक आधार के तौर पर उभरता दिखाई दे रहा है। हालांकि आने वाले समय में पार्टी कुमाऊं को कितना राजनीतिक स्पेस देती है, यह भी उसके चुनावी समीकरणों का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

फिलहाल तस्वीर यही है कि उत्तराखंड भाजपा में गढ़वाल की राजनीतिक मौजूदगी मजबूत हुई है और इस पूरे समीकरण में पौड़ी गढ़वाल एक अहम पावर सेंटर के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।