हरीश रावत की वापसी पर सियासत तेज, कांग्रेस ने बताया अनुभव का लाभ, भाजपा बोली- हाशिये पर डाले गए
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के लंबे समय बाद उत्तराखंड लौटने के साथ ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है। देहरादून पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया और रोड शो निकाला। इसके बाद कांग्रेस और भाजपा नेताओं के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है।
प्रदेश कांग्रेस महासचिव नीरज त्यागी ने कहा कि हरीश रावत पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। करीब दो महीने बाद प्रदेश लौटने पर कार्यकर्ताओं और लोगों ने जिस तरह उनका स्वागत किया, वह उनके प्रति स्नेह का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अलग-अलग नेताओं को केंद्रीय नेतृत्व ने जो जिम्मेदारियां दी हैं, सभी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
त्यागी ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी हरक सिंह रावत, चुनाव प्रचार समिति की कमान प्रीतम सिंह, आरोपपत्र समिति की जिम्मेदारी करण माहरा और घोषणापत्र समिति की जिम्मेदारी भुवन कापड़ी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन किसी एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयास से मजबूत होता है।
कांग्रेस ने गिनाया हरीश रावत का अनुभव
नीरज त्यागी ने कहा कि हरीश रावत पूर्व मुख्यमंत्री और कई बार सांसद रहे हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक अनुभव का लाभ कांग्रेस संगठन को निश्चित रूप से मिलेगा। उन्होंने राजनीतिक चर्चाओं के बजाय प्रदेश से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने की जरूरत बताई।
उन्होंने नीट परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक, प्रदेश की कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे उठाए। साथ ही अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग और उत्तराखंड की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता बताई।
भाजपा ने हरीश रावत को लेकर साधा निशाना
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने हरीश रावत के रोड शो को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि हरीश रावत का संघर्ष कांग्रेस के भीतर ही है और वर्तमान नेतृत्व उन्हें हाशिये पर डालने का काम कर रहा है।
चमोली ने यह भी कहा कि हरीश रावत अपने राजनीतिक अस्तित्व को दिखाने के लिए इस तरह के प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने इसे कांग्रेस का अंदरूनी विवाद बताते हुए दावा किया कि इसका राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है।

