October 22, 2026
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आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार और अनुशासन भी जरूरी: CM धामी

By on October 22, 2026 0 8 Views

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक और व्यावसायिक रूप से सफल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें अच्छे संस्कारों से युक्त जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों का ज्ञान भी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी और मेहनत को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री बुधवार को देहरादून स्थित द टॉसब्रिज स्कूल के संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संस्कार दिवस भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है। ज्ञान व्यक्ति को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है, जबकि संस्कार उसे सही दिशा में चलना सिखाते हैं।

धामी ने कहा कि विद्यालय का उद्घाटन वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। उनका जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विद्यार्थियों को डॉ. कलाम की आत्मकथा ‘अग्नि की उड़ान’ पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि बड़े सपने देखने के साथ उन्हें साकार करने के लिए निरंतर मेहनत और दृढ़ संकल्प जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना सभी के प्रति सम्मान, बड़ों का आदर और जरूरतमंदों की सहायता करने की प्रेरणा देती है। विद्यालय के ध्येय वाक्य ‘ज्ञानं भारः क्रियां बिना’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कर्म के बिना ज्ञान अधूरा है। ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसका उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में किया जाए।

पांच साल में 35 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत प्रौद्योगिकी, नवाचार और आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को आधुनिक विषयों में दक्षता हासिल करने के साथ योग, ध्यान, अनुशासन और संस्कारों को भी जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान और भारतीय जीवन मूल्यों का समन्वय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को मजबूत बनाएगा।

धामी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, कौशल और रचनात्मकता पर विशेष जोर दिया गया है। राज्य सरकार भी शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है। युवाओं को रोजगार पाने के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार सृजन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।

भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और निरंतर सीखने की इच्छा ही सफलता का वास्तविक आधार हैं। असफलताओं से निराश होने के बजाय उनसे सीख लेकर लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस लक्ष्य में शिक्षित, संस्कारित, कुशल और आत्मनिर्भर युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि विद्यालय के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा और अच्छे संस्कारों से प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे। समारोह में विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।