October 12, 2026
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अशोक सिंघल के विचारों और आदर्शों को आत्मसात कर श्रेष्ठ उत्तराखंड का निर्माण करना लक्ष्य : मुख्यमंत्री धामी

By on October 12, 2026 0 5 Views

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना के जागरण के लिए समर्पित किया। राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन बनाने में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। उनके अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत के संकल्प को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मुख्यमंत्री सोमवार को पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज सभागार में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल पर प्रकाशित विशेषांक का विमोचन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज को संगठित करने की प्रेरणादायी मिसाल है। बड़े दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद उनका जीवन सादगी, सहजता और सेवाभाव से परिपूर्ण रहा। उनका व्यक्तित्व बताता है कि किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्य उसके पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आचरण और समाज के लिए किए गए कार्यों से आंका जाता है। उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्व निभाने की प्रेरणा देते रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने तक अशोक सिंघल के प्रयास महत्वपूर्ण रहे। उन्होंने देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रवास कर संतों, धर्माचार्यों और समाज के अनेक वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का काम किया। भगवान श्रीराम के आदर्शों को भारतीय समाज के जीवन-मूल्यों का आधार मानने वाले अशोक सिंघल का जीवन मर्यादा, सेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता और सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान राष्ट्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। इसी भावना के अनुरूप उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, गौवंश के संरक्षण और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल की कल्पना ऐसे भारत की थी, जहां युवा आधुनिक शिक्षा के साथ अपने संस्कारों, परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी सजग हों। राज्य सरकार युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी प्रतिभा को शिक्षा, खेल, रोजगार तथा सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही है। दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं, प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित कर रही है। इसके लिए केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा गलियारा, शारदा गलियारा और गोल्ज्यू गलियारा जैसी परियोजनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने हरिपुर-कालसी में मां यमुना के तट पर स्नान घाट के लोकार्पण और मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुंभ सनातन संस्कृति, भारतीय आस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं का भव्य उत्सव होगा। राज्य सरकार इसे दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और वे सुरक्षित एवं आध्यात्मिक अनुभव के साथ लौटें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल के विचारों और आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही उनके जन्म शताब्दी वर्ष को सार्थक बनाने का माध्यम है। राज्य सरकार उनकी प्रेरणा से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने, प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और श्रेष्ठ राज्य के निर्माण के लिए अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी, संत-महात्मा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।