September 27, 2026
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जीएसटी विभाग की 45.64 लाख की मांग का आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त

By on September 27, 2026 0 8 Views

रामनगर। रामनगर से जुड़ी जीएसटी कार्रवाई के एक मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट की नैनीताल खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जीएसटी विभाग की ओर से धारा 74 के तहत पारित करीब 45 लाख 64 हजार 844 रुपये की कर और पेनल्टी संबंधी मांग के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी करदाता के खिलाफ प्रतिकूल आदेश पारित करने से पहले उसे व्यक्तिगत सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना जरूरी है।

मामला मैसर्स शिवतारा सेंटरिंग सर्विसेज बनाम कमिश्नर स्टेट टैक्स उत्तराखंड एवं अन्य से जुड़ा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता फैज़ुल हक और अधिवक्ता संजीव कुमार अग्रवाल ने पक्ष रखा।
मामले में मुख्य सवाल यह था कि जीएसटी विभाग की ओर से प्रतिकूल आदेश पारित करने से पहले करदाता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया था या नहीं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि करदाता ने व्यक्तिगत सुनवाई का विकल्प नहीं चुना, विभाग अपने दायित्व से मुक्त नहीं हो जाता।
कोर्ट ने विवादित आदेश को निरस्त करते हुए विभाग को संबंधित पक्ष को उचित व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद कानून के अनुसार नया आदेश पारित करने की स्वतंत्रता दी है।
अधिवक्ता फैज़ुल हक के मुताबिक, यह फैसला जीएसटी कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत को स्पष्ट करता है। साथ ही, प्रतिकूल कर आदेश पारित करने से पहले करदाता को अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर दिया जाना जरूरी है।