पटवाडांगर की जमीन पर नेताप्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को घेरा, कहा – बिना पैमाइश और मालिकाना हक तय किए होटल के लिए सौंप दी जमीन
नैनीताल। पटवाडांगर की जमीन को निजी निवेश के लिए देने के मामले में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन की न पैमाइश हुई थी और न ही स्वामित्व स्पष्ट था, उसे सरकार ने कृषि विभाग की बताकर निवेश के लिए सौंप दिया। सरकारी दस्तावेजों में एक ही जमीन के मालिक और रकबे का अलग-अलग उल्लेख होने को उन्होंने गंभीर अनियमितता बताया।
चार नवंबर को कांग्रेस के ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान के तहत यशपाल आर्य कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य गुरदीप सप्पल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकर्ताओं के साथ पटवाडांगर पहुंचे। उन्होंने पटवाडांगर की 13.64 एकड़ जमीन और ज्योलीकोट स्थित लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन को निजी हाथों में सौंपने का विरोध किया। आर्य ने दावा किया कि धामी सरकार बाजार भाव के अनुसार करीब एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी जमीनों और धरोहर संपत्तियों को 60 से 90 साल के लिए निजी हाथों में देने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने प्रदेश के 11 स्थानों पर संपत्तियों को बचाने के संकल्प के साथ रक्षा सूत्र बांधे।
एक जमीन, पांच बार बदला मालिकाना ब्योरा
आर्य ने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि अक्टूबर 2023 की बैठक में पटवाडांगर की जमीन को जैव प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर से संबंधित और करीब 60 एकड़ बताया गया। जून 2024 में इसे कृषि एवं उद्यान विभाग की 80 एकड़ जमीन, जबकि 15 जनवरी 2025 के शासनादेश में कृषि विभाग के स्वामित्व वाली 103 एकड़ भूमि दर्ज किया गया। अगस्त 2025 की बैठक में इसे जैव प्रौद्योगिकी परिषद स्थित भूमि और सितंबर 2025 की अधिसूचना में 108 एकड़ बताया गया। विश्वविद्यालय के लिए भी कभी 30, कभी 15 और कभी 26.4 एकड़ जमीन का उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2025 के शासनादेश के तहत 103 एकड़ जमीन में से 23 एकड़ प्रीमियम रिसॉर्ट के लिए उत्तराखंड निवेश एवं आधारभूत संरचना विकास बोर्ड को दे दी गई, जबकि उस समय जमीन की पैमाइश और अभिलेख उपलब्ध नहीं थे। चार सितंबर 2025 को राजस्व विभाग ने पटवाडांगर गांव का सर्वेक्षण और अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके पांच दिन बाद राजस्व परिषद ने जिलाधिकारी नैनीताल को पत्र लिखकर बताया कि 108 एकड़ भूमि वन और राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं है।
आर्य ने सवाल उठाया कि जब जमीन का दर्ज मालिक ही स्पष्ट नहीं था तो उसे कृषि विभाग की बताकर दूसरे विभाग को कैसे सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि पहले जमीन देने का निर्णय हुआ, बाद में पैमाइश शुरू हुई और अब उसी जमीन का 90 साल का टेंडर निकाल दिया गया है।
1,232 एकड़ भूमि के प्रस्तावों पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल की शक्तियों का अकेले इस्तेमाल करते हुए ये फैसले लिए, जबकि संबंधित अधिनियम भी उन्हें ऐसा अधिकार नहीं देता। उनके मुताबिक, सरकारी दस्तावेजों में करीब 1,232 एकड़ भूमि उत्तराखंड निवेश एवं आधारभूत संरचना विकास बोर्ड और सिडकुल को देने के प्रस्ताव स्वीकृत होने का उल्लेख है। लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवनों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चल रही है और करीब 560 एकड़ अतिरिक्त भूमि सौंपने की कार्रवाई जारी है।
आर्य ने आरोप लगाया कि सरकारी जमीनों और धरोहर संपत्तियों को निजी हाथों में देने में जल्दबाजी की जा रही है। उन्होंने पटवाडांगर के मामले में जमीन के स्वामित्व, वास्तविक रकबे और उसे हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पर सरकार से जवाब मांगा।

