गन्ना किसानों के मुद्दे पर उमेश शर्मा को कांग्रेस का जवाब, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजीव महर्षि ने गिनाईं पुरानी सरकारों की उपलब्धियां
देहरादून। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष राजीव महर्षि ने निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा की ओर से कांग्रेस पर गन्ना किसानों के मुद्दे पर साथ नहीं देने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि किसानों की सुध लेने का काम कांग्रेस सरकारों ने किया। महर्षि ने अपने बयान में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से किसानों का कर्ज माफ करने और उत्तराखंड में कांग्रेस सरकारों के कार्यकाल के दौरान गन्ना किसानों तथा चीनी मिलों के हित में लिए गए फैसलों का उल्लेख किया।
राजीव महर्षि ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने किसानों का 71,680 करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद कांग्रेस सरकारों के दोनों कार्यकालों में गन्ना किसानों, चीनी मिलों और गन्ना उत्पादक क्षेत्रों के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
तिवारी सरकार के कार्यकाल में गन्ना विकास पर जोर
महर्षि ने कहा कि वर्ष 2002 से 2007 के बीच नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए राज्य परामर्शित मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की गई। उन्होंने बाजपुर, किच्छा और नादेही की सहकारी चीनी मिलों के संचालन के लिए सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भी उल्लेख किया।
उनके मुताबिक, इस अवधि में गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में उन्नत बीज, उत्पादकता बढ़ाने और गन्ना विकास समितियों की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए गए। चीनी मिलों के माध्यम से किसानों को गन्ने का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी सरकारी व्यवस्था की गई।
गन्ने के मूल्य में 35 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी का दावा
राजीव महर्षि ने कहा कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी गन्ना किसानों के हित में कई फैसले लिए गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 में गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 250 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 285 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। इस तरह मूल्य में 35 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई, जो लगभग 15 प्रतिशत थी।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2013-14 में उत्तराखंड में गन्ने का मूल्य 285 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 280 रुपये प्रति क्विंटल था। इस आधार पर उत्तराखंड में गन्ने का मूल्य उत्तर प्रदेश से पांच रुपये अधिक था।
चीनी मिलों को राहत देने के लिए उठाए कदम
महर्षि ने कहा कि दिसंबर 2013 में राज्य सरकार ने चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने और किसानों का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए। उनके अनुसार, जनवरी 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने चीनी मिलों के लिए केंद्र सरकार से 350 करोड़ रुपये का राहत पैकेज दिलाने की पहल की थी। यह पैकेज ब्याजमुक्त ऋण योजना के तहत मांगा जाना था।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2013 में राज्य सरकार और चीनी मिल संचालकों के बीच हुई बैठक में गन्ना खरीद कर और समिति कमीशन में छूट देने का निर्णय लिया गया था। इसका उद्देश्य चीनी मिलों पर वित्तीय दबाव कम करना और किसानों के भुगतान को सुचारु बनाए रखना था।
भुगतान के लिए चरणबद्ध व्यवस्था का किया उल्लेख
राजीव महर्षि ने जनवरी 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की सरकार की ओर से गन्ना भुगतान के संबंध में लिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर 240 रुपये प्रति क्विंटल का पहला भुगतान करना था। पेराई सत्र समाप्त होने के तीन महीने के भीतर 20 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त भुगतान किया जाना था, जबकि शेष 20 रुपये प्रति क्विंटल के भुगतान के लिए सरकार की ओर से चीनी मिलों को वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था की गई थी। इस तरह 280 रुपये प्रति क्विंटल के निर्धारित मूल्य का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था बनाई गई।
उमेश शर्मा से सत्ताधारी दल से सवाल करने को कहा
राजीव महर्षि ने निर्दलीय विधायक उमेश शर्मा पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें गन्ना किसानों के मुद्दे पर सवाल सत्ताधारी दल से करना चाहिए और पूछना चाहिए कि उसने अपने दस साल के कार्यकाल में किसानों के लिए क्या किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उमेश शर्मा का बयान उनकी मानसिकता को दर्शाता है और कांग्रेस पर सवाल उठाने से यह जाहिर होता है कि वह सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहे हैं।

