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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग करने का विरोध, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बताया हमला

By on February 6, 2026 0 3 Views

लखनऊ: उत्तराखंड की धामी सरकार के मदरसा बोर्ड को भंग करने के फैसले पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कड़ी नाराजगी जताई है. देश के प्रमुख मुस्लिम संगठनों और विद्वानों ने इस कदम को भारतीय संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक सुर में उत्तराखंड सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है.

​संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला: ​इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इस फैसले को बेहद अफसोसनाक बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उन्हें संचालित करने का पूर्ण अधिकार देता है.

मौलाना ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के भी कई फैसले इस अधिकार की पुष्टि करते हैं. हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालन को लेकर स्पष्ट आदेश दिया है कि मुसलमान इन मदरसों को संचालित कर सकते हैं. ऐसे में मदरसा बोर्ड को खत्म करना देश के कानून और लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ है.

सरकार की नीति और मंशा पर सवाल​: विरोध दर्ज कराने वालों में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास भी शामिल रहे. उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री सबका साथ-सबका विकास और मुसलमानों के एक हाथ में कुरान व दूसरे में लैपटॉप की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ मदरसों को लगातार टारगेट किया जा रहा है.

मदरसों का ऐतिहासिक योगदान​: उलमा ने याद दिलाया कि मदरसों ने देश को आईएएस, आईपीएस, इंजीनियर, डॉक्टर और मंत्री दिए हैं. देश की आजादी में भी इन संस्थानों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं. ऐसे में मदारिसे अरबिया पर इस तरह की कार्रवाई कतई मुनासिब नहीं है. मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उत्तराखंड सरकार से अपील की है कि वह इस संवेदनशील मामले पर पुनर्विचार करे और अपने फैसले को वापस ले.

बता दें कि इस साल 30 जून को मदरसा बोर्ड खत्म हो जाएगा. इसके बाद एक जुलाई से उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड से संचालित होने वाले सभी मदरसे उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत संचालित होगे, जिनको उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी. जिसको देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है. इस संबंध में उत्तराखंड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए हैं.