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उत्तराखंड मे रणनीति की तैयारी, न जाने कौन, किस पर पड़े भारी, सभी दलों के दावे- “सरकार बन रही है हमारी”

By on March 7, 2022 0 199 Views

देहरादून: देवभूमि में हुए दंगल का अब परिणाम आने वाला है। ऐसे में सियासी दलों की धड़कनें बढ़ रही हैं। ​जिसमें सबसे बड़ा टारगेट अब सियासी दलों का अपने-अपने विधायकों को अपने साथ मजबूती से खड़ा रखने का है। जिस तरह का उत्तराखंड का इतिहास रहा है, और यहां चुनाव में दलबदल का खेल सबसे ज्यादा खेला जाता रहा है। ऐसे में अब भाजपा और कांंग्रेस अपने-अपने प्रत्याशियों के घेराबंदी में जुट गई है। इसके लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों के प्रभारी सहित कई दिग्गज नेता राजधानी का रुख कर रहे हैं। जरुरत पड़ी तो विधायकों को रेस्क्यू भी करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा के चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अब बस तीन दिन बाद 10 मार्च को सामने आ जाएगा, लेकिन भाजपा ने मतदान के बाद की संभावित स्थिति का आकलन कर अपनी तैयारी शुरू कर दी है। भाजपा ने मतगणना की तैयारी को लेकर आज देहरादून में एक बैठक की जिसमे केंद्रीय मंत्री व प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रल्हाद जोशी की मौजूदगी में पार्टी के सभी सांसदों, प्रांतीय पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों, प्रत्याशियों और विधानसभा क्षेत्र प्रभारियों ने शिरकत की । विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय की रविवार को उत्तराखंड में एंट्री हुई है। उन्हें जोड़तोड़ की राजनीति का रणनीतिकार माना जाता है। 2016 में कांग्रेस में सेंधमारी के असल सूत्रधार विजयवर्गीय ही थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव मतगणना से पहले भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें खास मिशन को अंजाम देने के लिए भेजा है।

आपको बता दें पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ मुलाकात पहले ही कर चुके हैं जिसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। सियासी गलियारों में इस मुलाकात को प्रदेश में भाजपा की ओर से सरकार गठन की संभावनाओं के मद्देनजर की जाने वाली जोड़-तोड़ की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है। और इस काम के लिए रमेश पोखरियाल निशंक बेहतरीन खिलाड़ी हैं। आपको बता दें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद डा. रमेश पोखरियाल निशंक व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बीच लंबी बैठक हो चुकी है। वहीं कांग्रेस कैलाश विजयवर्गीय को लोकतन्त्र का हत्यारा बता रही है ।

मतगणना से दो दिन पहले, यानी आठ मार्च से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन पार्टी के बड़े नेताओं से गुलजार नजर आएगा। प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव एवं तीनों सह प्रभारी देहरादून पहुंचकर मतगणना के दिन पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप देंगे। मतदान के बाद पार्टी की ओर से विभिन्न स्तर पर जुटाए गए फीडबैक के बाद पार्टी और उसके दिग्गज नेताओं का हौसला बढ़ा हुआ है। मतदाताओं की खामोशी को पार्टी एंटी इनकंबेंसी के तौर पर आंक रही है। इसी वजह से बहुमत पाने का भरोसा जताया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है की पार्टी भारी बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। और पार्टी मतगणना से पहले पूरी सावधानी बरत रही है। मतदान के बाद से ही ईवीएम की सुरक्षा के लिए कार्यकर्त्‍ताओं को अलग-अलग स्थानों पर स्ट्रांग रूम के समीप तैनात किया गया है। मतगणना से दो दिन पहले प्रदेश प्रभारी के साथ ही तीनों सह प्रभारी दीपिका पांडेय सिंह, राजेश धर्माणी और कुलदीप सिंह इंदौरा के देहरादून पहुँचकर रणनीति तैयार करेंगे।

कांग्रेस के लिए ये चुनाव संजीवनी साबित हो सकता है। सरकार बनने पर कांग्रेस केन्द्र में अपना दोबारा सत्ता पाने का एक कदम मान सकती है। ऐसे में दोनों दल हर कीमत पर सरकार बनाने के प्रयास में जुट गए है। भाजपा में पुराने दिग्गज रमेश पोखरियाल निशंक और कांग्रेस में हरीश रावत के हाथ में सरकार बनाने की चाबी हो सकती है। निशंक और रावत दोनों की राजनीति एक ही पटरी पर चलती हुई मानी जाती है। ऐसे में परिणाम आने के बाद दोनों की भूमिका खासा अहम मानी जा रही है। जो कि जोड़ तोड़ के भी बड़े खिलाड़ी माने जाते हैं।

दोनों दी दलों के नेता ऑफ रिकार्ड ये बात स्वीकार कर रहे हैं की सरकार बनाने के लिए निर्दलीय और दूसरे दलों की जरुरत पड़ सकती है। यानि नेता इस बार ये मानते हैं कि सरकार बनाने के लिए किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाला है। जिससे त्रिशंकु विधानसभा होने के आसार भी लगने लगे हैं। परिणाम से पहले अब भाजपा, कांग्रेस सरकार बनाने की जुगत में जुट गए हैं। इसके लिए निर्दलीय, बसपा और यूकेडी ​तीसरे विकल्प के तौर पर देखे जा रहे हैं। चुनाव तक खुद को तीसरा विकल्प मान रही आम आदमी पार्टी का वोटिंग के बाद कुछ खास रूझान देखने को नहीं मिल रहा है। आप के सीएम फेस कर्नल अजय कोठियाल की अपनी ही सीट फंसी हुई मानी जा रही है। जिससे ये चुनाव परिणाम प्रदेश की राजनीति का भविष्य भी तय करेंगे।