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मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बिल्डिंग बायलॉज की समीक्षा के लिए गठित की 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति

By on February 25, 2026 0 8 Views

देहरादून। उत्तराखण्ड की बढ़ती भूकंपीय संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने भवन निर्माण नियमों में व्यापक संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। भारतीय मानक ISO 1893-2025 के अनुसार पूरे राज्य के जोन-6 में शामिल होने के बाद यह अहम निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने वर्तमान बिल्डिंग बायलॉज की समीक्षा के लिए 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है।

सीबीआरआई निदेशक करेंगे समिति की अध्यक्षता

समिति की अध्यक्षता CSIR-CBRI, रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार करेंगे, जबकि ULMMC, देहरादून के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार को संयोजक बनाया गया है।

गौरतलब है कि वर्तमान बिल्डिंग बायलॉज भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने संस्करण ISO 1893-2002 पर आधारित हैं, जिन्हें अब नवीन भूकंपीय मानकों के अनुरूप संशोधित किया जाएगा।

आधुनिक तकनीक और आपदा-सुरक्षा पर फोकस

समिति में सीबीआरआई, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरणों और भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

समिति का उद्देश्य—

  • मौजूदा बायलॉज की विस्तृत समीक्षा
  • भूकंप, भूस्खलन और अन्य आपदा जोखिमों को समाहित करना
  • भूकंप-रोधी डिजाइन, विंड लोड और स्ट्रक्चरल सेफ्टी प्रावधान शामिल करना
  • पारंपरिक पहाड़ी निर्माण तकनीकों को वैज्ञानिक रूप से जोड़ना
  • जलवायु अनुकूल और पर्यावरण संरक्षण आधारित निर्माण को बढ़ावा देना

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने कहा कि राज्य सरकार भवन बायलॉज को अधिक व्यवहारिक, सुरक्षित और आपदा-रोधी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है।

सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करने पर जोर

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल नियमों में बदलाव करना नहीं, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति विकसित करना है। संशोधित नियमों में भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल

समिति में आईआईटी रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, यूएनडीपी, ब्रिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण सहित विभिन्न तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ सदस्य शामिल किए गए हैं।

क्या होगा फायदा?

✔ भवनों की संरचनात्मक मजबूती बढ़ेगी
✔ भूकंप व अन्य आपदाओं में जन-धन की हानि कम होगी
✔ शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा
✔ सतत और आपदा-सक्षम विकास सुनिश्चित होगा

समिति अपनी रिपोर्ट उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं आवास विभाग को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर संशोधित बिल्डिंग बायलॉज लागू किए जाएंगे।