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अफसरों को मनचाही पोस्टिंग दिलवा रहे मंत्रीगण बदनाम हो रही सरकार ! कैसे होगा बेड़ा पार ? पढ़िये पूरी खबर…

By on January 1, 2022 0 269 Views

देहरादून। उत्तराखंड मे मंत्री अफसरों की नियुक्ति कराने और उन्हे मनचाहा विभाग दिलाने के लिए सुर्खियों मे हैं। मामला सिर्फ मंत्रियों को नियुक्ति दिलाने का नहीं बल्कि अफसरों को मनमुताबिक पोस्टिंग कराने का है । पिछले कुछ वक़्त से उत्तराखंड के मंत्री अफसरों की प्राइम पोस्टिंग को लेकर ख़ासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं चाहे कोई अफसर दागी हो या नया हो लेकिन मंत्री अफसरों को ओहदे पर बैठने के लिए पूरी ताकत के साथ मैदान मे नज़र आ रहे हैं। मंत्री अफसरों की पोस्टिंग के लिए खत लिखकर निर्देश भी न्बिर्देश दे रहे हैं । कुछ दिन पहले तो उत्तराखंड के एक मंत्री ने तो पहले एक अफसर को आदेश न मानने पर निलंबित और कुछ समय बाद पुरानी जगह ही पोस्टिंग दे दी थी। पोस्टिंग दिलाने के लिए  यह भी नहीं देखा जा रहा है कि कौन अफसर कितना बड़ा दागी है।

गन्ना मंत्री यतीश्वरानंद

संतों की तरह कपड़े पहनने वाले मंत्री जी ने पहले तो गन्ना विभाग में करोड़ों की गड़बड़ी के आरोपी अफसर आरके सेठ को अहम ओहदा देने का आदेश कर दिया। तत्कालीन सचिव ने सेठ को तैनाती देने की बजाय निलंबित कर दिया। लेकिन मंत्री जी ठान चुके थे। लिहाजा पहले सचिव को बदला गया और फिर सेठ को अहम ओहदे पर तैनाती का आदेश खुद मंत्री ने कर दिया। मंत्री ने हरिद्वार में जिला आबकारी अधिकारी के पद पर एक अफसर अशोक मिश्रा की तैनाती के लिए विभागीय सचिव को सीधा आदेश कर दिया। पहले तत्कालीन सचिव सचिन कुर्वे और बाद में आए शैलेश बगौली ने आदेश नहीं किया। फिर सचिव को बदला गया और नए आए सचिव सेमवाल ने अशोक मिश्रा को हरिद्वार का जिला आबकारी अधिकारी बना दिया। सवाल ये उठता है की एक संत का शराब कारोबार से क्या वास्ता।

आयुष मंत्री हरक सिंह रावत

तीन साल तक जेल में रहे और आज भी विजिलेंस जांच का सामना कर रहे चर्चित प्रोफेसर मृत्युंजय मिश्रा को आयुर्वेद विवि का कुलसचिव बना दिया गया। इतना ही नहीं, उनकी सवेतन बहाली कर दी गई। जाहिर है कि विभागीय सचिव चंद्रेश यादव ने विभागीय मंत्री हरक सिंह रावत की मर्जी के बगैर तो इतना विवादित आदेश किया नहीं होगा। इस आदेश से भी सरकार की फजीहत हो रही है। इससे पहले मंत्री जी ने एक डीएफओ को लैंसडौन से हटवाया था। यह अलग बात है कि इस अफसर ने एक लेटर बम फोड़ कर सरकार की पेशानी पर बल डाल दिए हैं।

शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत

तीन माह पहले मंत्री ने रुड़की नगर निगम से सहायक नगर अधिकारी चंद्रकांत भट्ट को हटाकार मुख्यालय अटैच कर दिया। भट्ट ने ज्वाइन नहीं किया तो उन्हें निलंबित कर दिया गया। कुछ समय बाद शहरी विकास मंत्री बंशीधर भगत अचानक मेहरबान हो गए और भट्ट को फिर से रुड़की में ही तैनाती का आदेश कर दिया।