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कॉर्बेट टाईगर रिजर्व के कालागढ़ रेंज में वन्यजीव के घरों पर चल रहीं है आरिया, इसका जिम्मेदार कोन।

By on September 1, 2021 0 700 Views

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में इन दिनों सब कुछ ठीक नही चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि यहां कालागढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों तूफानी गति से विकास कार्य हो रहे हैं। जो किसी आम आदमी को हैरान करने के लिए काफी हैं। ऐसे में वन्यजीव प्रेमियों का तो हाल ही बेहाल है।

पहले आपको कॉर्बेट टाइगर रिर्जव और कालागढ़ टाइगर रिजर्व के बारे में बता दे। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व 1288 वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है। ऐसे में प्रशासनिक दृष्टि से इसे रामनगर टाइगर रिजर्व और कालागढ़ टाइगर रिजर्व में बांटा गया है।

कॉर्बेट के रामनगर के हिस्से में एक डीएफओ (डिप्टी डायरेक्टर) हैं। वहीं कालागढ़ में भी एक डीएफओ होते हैं। इन सब के ऊपर एक कंजरवेटर (डायरेक्टर) होते हैं। जिन पर प्रशासनिक और वन्यजीव सुरक्षा के साथ ही टाइगर हैबिटेट को बचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।


लेकिन कालागढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ ने कालागढ़ में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (ntca) और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (ngt) के अनुमति के बिना और मानकों को ताक पर रखते हुए धड़ल्ले से विकास कार्य कराए जा रहे हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि इस काम के लिए नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन ऑथरिटी और एनजीटी तो बहुत दूर की बात है, यहां तो राज्य सरकार या शासन से भी कोई अनुमति नही मिली है।

ऐसे में यहां हो रहे इन विकास कार्यो की आड़ में टाइगर रिजर्व से जमकर पेड़ भी काटे जा रहे हैं। जिन्हें टाइगर रिजर्व के बाहर भेज जा रहा है। इसके साथ ही यहां नदी से भी खनन किया जा रहा है।


अब जरा यहा हो रहे कामो के बारे में पढ़ लीजिए। बताया जा रहा है कि यहां युद्ध स्तर पर एक सड़क बनाई जा रही है। जो कालागढ़ से मोरघट्टी को जोड़ रही है। हालांकि यह वन मार्ग पहले से मौजूद है लेकिन इसे सीसी मार्ग किया जा रहा है। जिसके लिए बीच बीच मे छोटे छोटे पुल भी बनाये जा रहे हैं। इसके साथ ही यहां दीवार बनाने का भी प्रस्ताव है। जिसे बनाने के लिए लोगो मे होड़ लगी हुई है। सूत्र बताते हैं कि यहां बड़ी संख्या में गेस्ट हाउस या हट्स का भी निर्माण किया जा रहा है।


इस मामले में बाघ बचाओ समिति के अध्यक्ष मदन जोशी कहते हैं कि डीएफओ किशन चंद पहले से ही विवादित अधिकारी रहे हैं। इन पर राजाजी में डिप्टी डायरेक्टर रहते हुए भ्रष्ट्राचार के कई आरोप लगे थे। तब इन्हें वहां से हटा दिया गया था। अब किशन चंद कॉर्बेट में आकर गुल खिला रहे हैं। वह यहां के टाइगर हैबिटैट को ना सिर्फ डिस्टर्ब कर रहे हैं, बल्कि उसे मिटाने पर तुले हुए हैं। मदन जोशी कहते हैं कि वह सरकार को बदनाम करने के लिए इस तरह के काम कर रहे हैं। इन्हें तत्काल कॉर्बेट से हटाया जाए और इनके द्वारा किये गए कार्यो की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
द कॉर्बेट फाउंडेशन के डॉ हरेंद्र बरगली कहते हैं कि यदि इस तरह का कोई भी कार्य हो रहा है तो वह चिंताजनक है। हालांकि इस मामले में हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है। चूंकि मामला अब न्यायालय में है तो कुछ भी कहना उचित नही होगा।
उधर कॉर्बेट प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधी हुई है।