Breaking News
  • Home
  • राजनीति
  • विश्व बाघ दिवस पर कॉर्बेट में जागरूकता की अलख, छात्रों और स्थानीय समुदाय ने लिया बाघ संरक्षण का संकल्प

विश्व बाघ दिवस पर कॉर्बेट में जागरूकता की अलख, छात्रों और स्थानीय समुदाय ने लिया बाघ संरक्षण का संकल्प

By on July 29, 2026 0 14 Views

रामनगर। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में बाघ संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। ढेला, सरपदुली रेंज और कालागढ़ वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में छात्रों, स्थानीय ग्रामीणों, पर्यटकों और वन कर्मियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सभी ने बाघों और जैव विविधता के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला और उप निदेशक राहुल मिश्रा के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रमों में बाघों के संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर विस्तृत जानकारी दी गई। ढेला स्वागत द्वार पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में स्कूली छात्रों ने जागरूकता रैली निकाली और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संदेश दिए।

अधिकारियों ने कहा कि बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का सबसे बड़ा संकेतक है।
सरपदुली रेंज के धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर में छात्रों को बाघों के व्यवहार, उनके पदचिह्नों की पहचान, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम और कॉर्बेट की समृद्ध जैव विविधता के बारे में जानकारी दी गई। वहीं कालागढ़ वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र में विचार गोष्ठी और स्वच्छता अभियान आयोजित कर स्थानीय समुदाय को संरक्षण में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि भारत में वर्तमान में लगभग 3,682 बाघ हैं और दुनिया के करीब 70 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हैं। यह उपलब्धि प्रभावी संरक्षण नीति, वन विभाग, स्थानीय समुदाय और संरक्षण सहयोगियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों से प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।

“बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का प्रतीक है। बाघों का संरक्षण हमारी जैव विविधता, जल स्रोतों, वनों और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है। वन्यजीव संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक दायित्व है।”