दिव्यांग बच्चों ने देखी फ़िल्म द रेड बलून…….
रामनगर। रचनात्मक शिक्षक मण्डल उत्तराखण्ड की पहल पर जे एस आर रेजीडेंसी स्कूल फ़ॉर स्पेशल नीड चिल्ड्रन,बसई के 50 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने आज द रेड बलून देखी।फ़िल्म द रेड बलून 1956 की फ्रांसीसी फंतासी कॉमेडी ड्रामा फीचर लेखक अल्बर्ट लैमोरिस द्वारा लिखित और निर्मित है। फ़िल्म पास्कल नाम के एक बच्चे के पर केंद्रित है जो एक दिन एक लाल गुब्बारा पाता है।पूरी फिल्म उस लाल गुब्बारे के इर्द गिर्द घूमती है।उसे पेरिस के मेनिलेमॉन्टेंट में फिल्माया गया था। रेड बैलून को सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए 1957 अकादमी पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय कान महोत्सव में 1958 गोल्डन पाम से सम्मानित किया गया था।रेड बैलून का समय सिर्फ 35 मिनट है और फ़िल्म में बहुत कम संवाद होता है। आधुनिक हॉलीवुड प्रस्तुतियों की संरचनात्मक जटिलताओं के बिना कहानी काफी सरल और सीधी है। लेकिन फिर, द रेड बैलून अब तक की सबसे शक्तिशाली फिल्मों में से एक मानी गयी है।भले ही द रेड बैलून को अक्सर बच्चों के लिए एक फिल्म के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, यह सभी उम्र के दर्शकों द्वारा पसंद किया जाता है।द रेड बैलून दिखाता है कि भावनात्मक गहराई और कल्पना की उड़ान बहुत आगे जाती है।फ़िल्म दिखाते हुए आयोजक नवेंदु मठपाल ने बच्चों से बातचीत भी की।तय हुआ कि माह में दो बार इन बच्चों को शिक्षक मण्डल द्वारा उनके अनुरूप विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां करवायी जाएंगी।श्वेता पंत,कल्पना भंडारी समेत कुछ अन्य बच्चों ने भी फ़िल्म देखने के पश्चात अपनी प्रतिक्रियाएं भी दीं।इस दौरान सन्दीप रावत, पीयूषचिलवाल,ममता ,
अनिता देवी मौजूद रहीं।